Sex racket busted : 10 मिनट के लिए भी होती थी लड़कियों की बुकिंग, 700 से 10,000 तक तय होते थे दाम, रैपिडो से होती थी डिलीवरी
दिल्ली के पहाड़गंज में सेक्स रैकेट का पर्दाफाश, 23 लड़कियां मुक्त
रिपोर्ट : विजय कुमार पटेल
Sex racket busted : दिल्ली। दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में पुलिस ने एक बड़े सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस दौरान तीन नाबालिग लड़कियों समेत 23 महिलाओं को रेस्क्यू किया गया। पुलिस ने इस मामले में 7 दलालों को गिरफ्तार किया है, जबकि इस धंधे को चलाने वाले दो मुख्य आरोपी अभी फरार हैं। जांच में पता चला है कि यहां लड़कियों की बुकिंग महज 10 मिनट के लिए भी की जाती थी, जिसमें 700 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक वसूले जाते थे।
WhatsApp पर होती थी डील, रैपिडो से होती थी डिलीवरी

पुलिस जांच में सामने आया कि इस रैकेट का पूरा सिस्टम डिजिटल तरीके से ऑपरेट किया जा रहा था। ग्राहक ऑनलाइन संपर्क करने के बाद WhatsApp पर लड़कियों की तस्वीरें मंगवाते थे। पसंद आने पर कीमत तय होती थी और फिर रैपिडो बाइक या स्कूटी बुक कर लड़की को ग्राहक के पास भेज दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका अहम थी, जो ग्राहक और लड़की के बीच सौदा तय करते थे।
10 मिनट के लिए भी मिलती थी लड़की, होटल के बाहर खड़े रहते थे डिलीवरी बॉय
गिरफ्तार दलालों से पूछताछ में पता चला कि इस रैकेट में ग्राहकों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाता था। जरूरत के मुताबिक लड़कियों को कुछ मिनटों से लेकर घंटों तक के लिए बुक किया जा सकता था। यहां तक कि 5 से 10 मिनट के लिए भी बुकिंग होती थी, जिसके लिए ग्राहकों से 700 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक चार्ज किया जाता था। होटल और गेस्ट हाउस के बाहर डिलीवरी बॉय स्कूटी और बाइक लेकर खड़े रहते थे। ग्राहक के ऑर्डर देते ही लड़की को 10 मिनट के भीतर होटल या फ्लैट में पहुंचाया जाता था।
NGO की सूचना पर हुई कार्रवाई, कई होटल्स पर मारा गया छापा
इस मामले का खुलासा एक NGO ‘मनोबल’ की मदद से हुआ। संस्था की फाउंडर निर्मला बी. वाल्टर ने जिला उपायुक्त हर्षवर्धन को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने आधी रात को छापा मारा। इस दौरान पुलिस ने पहाड़गंज के कई होटलों में अनैतिक गतिविधियों का पर्दाफाश किया। खासतौर पर चूना मंडी स्थित ‘Yes Please’, ‘God Inn’ समेत कई होटलों को सेक्स रैकेट के अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
लड़कियों को बनाया जाता था मानसिक रूप से मजबूर
NGO के मुताबिक, इस धंधे में शामिल कई लड़कियों को जबरन नहीं, बल्कि मानसिक रूप से तैयार कर इस दलदल में धकेला जाता था। उन्हें आर्थिक मजबूरियों और भावनात्मक कमजोरी का फायदा उठाकर इस काम के लिए तैयार किया जाता था। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि लड़कियों को छोटे-छोटे काम देकर धीरे-धीरे इस धंधे में धकेला जाता था।
मुख्य आरोपी फरार, पुलिस कर रही तलाश
इस रैकेट को निजाम और रेहान नाम के दो लोग चला रहे थे, जो अब फरार हैं। पुलिस उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है और उनकी तलाश में कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है। साथ ही, इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है।