अब जजों के रिश्तेदार नहीं बनेंगे जज? सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के सामने उठा सवाल।
यह पहला मौका है कि जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने हाई कोर्ट के कॉलेजियम द्वारा जज बनने के लिए सिफ़ारिश कर भेजी गई वकीलों और जजों के साथ बातचीत की है। यह पहला मौका है जब हाई कोर्ट कॉलेजियम की सिफ़ारिश वाले जजों और वकीलों से सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा बातचीत की गई हो। इस दौरान एक वकील की तरफ से कॉलेजियम के सामने यह मांग रखी गई कि ऐसे वकीलों को जज बनाने की सिफ़ारिश ना की जाए, जिनके माता-पिता और रिश्तेदार पहले सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में जज रह चुके हो। इस प्रस्ताव को कई अन्य वकीलों का भी समर्थन मिला। कॉलेजियम में (सीजेआई) के अलावा, जस्टिस बीआर गवई, सूर्यकांत ऋषिकेश राय, और एएस ओका भी शामिल रहें।
मुकेश कुमार (क्राइम एडिटर इन चीफ)TV 9 भारत समाचार नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के सामने उठा सवाल, सीजेआई खन्ना ने उठाया, ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने हाल ही में हाई कोर्ट जज बनने के संभावित वकीलों व जूनियर जजों से बातचीत की गई है।
इस दौरान एक वकील की तरफ से कॉलेजों के सामने यह मांग रखी गई है कि ऐसे वकीलों को जज बनाने की सिफ़ारिश ना क जाएं। जिनके माता-पिता और रिश्तेदार पहले से ही सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जज रह चुके हो। इस प्रस्ताव को कई अन्य वकीलों का भी समर्थन मिला है। कॉलेजियम में सीजेआई के अलावा, जस्टिस बीआर गवई, सूर्यकांत, ऋषिकेश राय, और एएस ओका भी शामिल रहें।
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सुप्रीम कोर्ट ने किया आकलन………..
यह पहला मौका है जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने हाई कोर्ट के कॉलेजियम द्वारा जज बनने के लिए सिफ़ारिश कर भेजे गए वकीलों और ज़िला जजों के साथ बातचीत की है। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी सूटेबिल्टी और सहित क्षमता का आकलन किया। देश की टॉप कोर्ट के जजों ने इलाहाबाद, बॉम्बे और राजस्थान हाई कोर्ट के जजों के रूप में नियुक्ति के लिए सिफ़ारिश किए गए लोगों के साथ बातचीत की गई है।
साथ ही 22 दिसंबर को केंद्र को उन नामों को भेजा, जिन्हें उन्होंने हाई कोर्ट के जजों के रूप में नियुक्ति के लिए योग्य माना है।
जजों के रिश्तेदार पहले ही सफल वकील है………
कॉलेजियम में कुछ जजों की तरफ से कहा गया है कि हाई कोर्ट जज बनने के लिए कुछ ऐसा योग्य उम्मीदवार भी है जो वर्तमान में पूर्व सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जजों के क़रीबी रिश्तेदार हैं। ऐसी उम्मीदवार जज बनने से चूक सकते हैं। उन्हें लगता है कि इससे इन जज बनने की उम्मीदवारों को कोई नुकसान नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि वह पहले से ही एक सफल वकील है, और एक वकील के तौर पर काफी नाम कमाने के साथ-साथ खूब पैसा भी कमा रहे हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि पूर्व जजों के रिश्तेदारों को नई लिस्ट में शामिल किया गया है या नहीं।
अलग-अलग समुदायों या प्रतिनिधित्व का मिलेगा मौका…………….
कॉलेजियम की तरफ से कहा गया है कि चयन प्रक्रिया से ऐसे उम्मीदवारों के बाहर होने से कई योग्य पहली पीढ़ी के वकीलों को संवैधानिक अदालतों में प्रवेश करने का मौका मिलेगा। ऐसा करने से सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में विविधता आएगी। साथिया अलग-अलग समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों को जज बनने का मौका मिलेगा। इससे पहले यह चलन था कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम केवल हाई कोर्ट के पेस वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के लिए लिस्ट का बायोडाटा स उनके पिछले जीवन पर ख़ुफ़िया रिपोर्ट और राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों की राय के आधार पर काम करता था।
अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के कॉलेजियम द्वारा भेजे गए उम्मीदवारों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की है। उनके व्यवहार और न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए सूटेबिल्टी काशी के तौर पर आकलन किया गया है।
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