लाहौर एक दास्तां है, जो हिंदुओं को यह बताती है कि पैसा कमा लेना सब कुछ नहीं है।

भारत में लाहौर पेशावर मुल्तान ढाका गुजरांवाला मीरपुर खास में बड़ी-बड़ी हवेलियों और बड़ी-बड़ी कोटिया रखने वाले हिंदू और सिखों को भी रातों-रात अपना सब कुछ छोड़कर भागना पड़ा था। हिंदुओं को रातों-रात कराची, लाहौर, कश्मीर, बलोच, कांधार छोड़ना पड़ा।

लाहौर एक दास्तां है , जो हिंदुओं को यह बताती है कि पैसा कमा लेना सब कुछ नहीं है।

  • रिपोर्ट : मुकेश कुमार : क्राइम एडिटर इन चीफ : नई दिल्ली। 

लाहौर में 1938 में इस गली में हवेलियां बनाने वाले हिंदुओं क्या पता था कि नव वर्ष बाद ही 1947 में यहां से सब कुछ छोड़कर भागना पड़ेगा?

श्री राम के पुत्र लव द्वारा बसाया गया शहर लाहौर। महाराज रणजीत सिंह के समय लाहौर में वाराणसी से ज़्यादा मंदिर और गुरुद्वारे थे। बंटवारे तक व्यापार में अग्रवालों, जाटों और सिखों का डंका बजता था।

मगर इन मूर्खो ने सदैव छद्म धर्मनिरपेक्षता बनाए रखी। त्यौहार में म्लेच्छ मुसलमानों को अपने यहां काम पर रखते गए। उन्हीं मुसलमानों ने बहुसंख्यक होकर अग्रवालों और सिखों को घसीट-घसीट कर मारा। ऊंची-ऊंची शेखावाटी हवेलियां और सरदारों के महल जेहादियों ने कब्ज़ा लिया।

यह भी पढ़ें – विनय शंकर तिवारी को हाई कोर्ट से मिली जमानत, एक ही मामले में दो बार कार्यवाही पर ईडी को लगी फटकार

भारत में लाहौर पेशावर मुल्तान ढाका गुजरांवाला मीरपुर खास में बड़ी-बड़ी हवेलियों और बड़ी-बड़ी कोठियां रखने वाले हिंदुओं और सिखों को भी रातों-रात अपना सब कुछ छोड़कर भागना पड़ा था।

हिंदुओं को रातों-रात कराची, लाहौर, कश्मीर, बलोच, कांधार छोड़ना पड़ा।

हिंदू वाल्मीकि मेगवार समाज के जो लाहौर रूक गए, वह मिटा दिए गए, उनकी बहू – बेटियां उठा ली गई, या उनका जबरन म्लेच्छ मुसलमानों से निकाह करा दिया गया।

90 के दशक में कश्मीर की घाटी से जब कश्मीरी हिंदू अपना सब कुछ छोड़ कर आए, भारत सरकार पूरा संविधान, पूरी सेना, सरकारी मशीनरी होते हुए भी एक भी कश्मीरी हिंदू को घाटी में सुरक्षा नहीं दे पाई।

पुलिस थी….सेना भी थी…..संविधान भी था…. कोर्ट भी था।

हम गाते रह गए —

“हस्ती” मिटती नहीं हमारी,,,,

और

वो मिटा रहें , हर रोज़ एक नई “बस्ती” हमारी,,,,

 

“जिनको धर्म प्यारा था ” , उनके 56 देश बन गए

और

“जिनको देश प्यारा था” , उनके देश के छींन-भिन्न होकर टुकड़े हो गए,,,

धर्म रहेगा तो हमारी यशोगाथा की कथा कहीं जाती रहेगी ,

धर्म नहीं रहा तो हमारे विरासत खंडहर बनकर ढह जाएंगी।

जर, जोरू, ज़मीन सब यही धरा रह जाएंगा, उसे कोई और भोगेगा जैसे लाहौर का व्यापार, कराची के कारखाने, बांग्लादेश का जूट उद्योग सब मोमिन के हाथों चला गया।

धर्म बचेगा तो यही देश बचेगा, वरना पाकिस्तान और बांग्लादेश भी कभी भारत का हिस्सा हुआ करते थे।

यह भी पढ़ें – 1 लाख का इनामिया बदमाश ज्ञानचंद्र पासी मुठभेड़ में ढेर, गोंड, बहराइच और बाराबंकी में था मोस्ट वांटेड