रेरा ट्रिब्यूनल ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण के सचिव के ख़िलाफ़ वारंट जारी किया
अधिवक्ता ने ट्रिब्यूनल को बताया, यह आदेश ईमेल के माध्यम से सूचित कराया गया था, लेकिन सिविल करवा के वारंट के अनुपालन में अधिकारी उपस्थित नहीं है। साथ ही पूर्व आदेश को वापस ले लिया यह प्रस्तुत करने के लिए कोई आवेदन दाखिल नहीं किया गया है कि अपील करता द्वारा डिग्री विधिवत रूप से संतुष्ट कर दी गई है।
रेरा ट्रिब्यूनल ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण के सचिव के ख़िलाफ़ वारंट जारी किया
- रिपोर्ट : मुकेश कुमार : क्राइम एडिटर इन चीफ : प्रयागराज , उत्तर प्रदेश।
रेरा ट्रिब्यूनल ने आदेश के अभिन्न करने और कारण को स्पष्ट न करने को गंभीर रूप से लेते हुए प्रयागराज विकास प्राधिकरण के सचिव के विरुद्ध जमानती वारंट जारी किया है।
यह आदेश ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुनीत कुमार व तकनीकी सदस्य देवेंद्र सिंह चौधरी की पीठ ने हिमांशु मोर्या की याचिका पर उनके अधिवक्ता की दलीलों को सुनकर दिया।
पिछली सुनवाई पर रेरा ट्रिब्यूनल ने हिमांशु मौर्य के अधिवक्ता अमित यादव को सुनने के बाद आदेश की अवहेलना के लिए पीडीए सचिव के विरुद्ध सीपीसी के आदेश 21 रेरा एक्ट की 53 व 57 के अंतर्गत वारंट जारी करते हुए तुम्हें यह स्पष्टीकरण देने का निर्देश गया था कि आदेशों की अवहेलना के लिए क्यों ना उन्हें हिरासत में लिया जाएं।
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अधिवक्ता ने ट्रिब्यूनल को बताया, यह आदेश ई-मेल के माध्यम से सूचित कराया गया था, लेकिन सिविल कारावास के वारंट के अनुपालन में अधिकारी उपस्थित नहीं है।
साथ ही पूर्व आदेश को वापस लेने या यह प्रस्तुत करने के लिए कोई आवेदन दाखिल नहीं किया गया है कि अपील करता द्वारा डिग्री विधिवत रूप से संतुष्ट कर दी गई है।
मामले के तथ्यों के अनुसार, राजकीय महिला पॉलिटेक्निक के प्रवक्ता हिमांशु मौर्य ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण की अलकनंदा अपार्टमेंट गोविंदपुर परियोजना में एक फ्लैट बुक कराया जिसका निर्माण पूरा कर 2 वर्षों में कब्जा किया जाना था।

परियोजना में देरी होने पर उन्होंने रेरा में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर रेरा में ब्याज के साथ कब्ज़ा देने का आदेश दिया।
पीडीए ने इस आदेश को रेरा ट्रिब्यूनल में अपील के माध्यम से चुनौती दी। ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान, प्राधिकरण ने ब्याज भुगतान करने की सहमति का शपथ पत्र देकर अपील निस्तारित कर ली है।
लेकिन ना तो फ्लैट ही पूरा करके कब्जा दिया, न ही ब्याज का भुगतान किया।
हिमांशु मौर्या ने क़ब्ज़े और ब्याज के लिए प्रत्यावेदन दिया, तो पीडीए ने रेरा ट्रिब्यूनल के आदेश के विरुद्ध हाई कोर्ट में अपील दाखिल कर दी।
हाई कोर्ट ने रेरा के आदेश का अनुपालन करने के निर्देश के साथ अपील खारिज कर दी है।
हिमांशु मौर्य के अनुसार, गणना के अभाव में रेरा के आदेश का अनुपालन हुआ या नहीं, यह नहीं पता लगाया जा सकता था, इसलिए उन्होंने रेरा ट्रिब्यूनल में आदेश के अनुपालन के लिए याचिका दाखिल की।
ट्रिब्यूनल ने प्राधिकरण को गणना उपलब्ध कराने का आदेश दिया। लेकिन उसके बाद अगली 5 तारीख पर प्राधिकरण की ओर से ना तो कोई गणना उपलब्ध कराई गई और ना ही कोई ट्रिब्यूनल के समक्ष उपस्थित हुआ।
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