राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का सख्त संदेश: “अब सर से पानी ऊपर जा चुका है, आतंकवाद किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा”
TMBU दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने पहलगाम आतंकी हमले और बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार को लेकर दी तीखी प्रतिक्रिया, कहा- अब चुप रहना मुमकिन नहीं
रिपोर्ट : अजय कुमार : भागलपुर : बिहार। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में आयोजित 48वें दीक्षांत समारोह के मौके पर बिहार के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खान का एक बड़ा और तीखा बयान सामने आया है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद पर बहस को फिर से ज़ोरदार बना दिया है।

दीक्षांत समारोह के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा “हम सबके दिमाग में यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि अब सर से पानी ऊपर जा चुका है। जो घटनाएं पहलगाम में हो रही हैं या बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही हैं, वह अब बर्दाश्त के बाहर हैं। अब समय आ गया है कि सख्ती से जवाब दिया जाए।”
देश की एकता के लिए चेतावनी और अपील
राज्यपाल ने इस मौके पर न केवल आतंकवाद की निंदा की, बल्कि समाज के हर वर्ग से देश की अखंडता और सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि “देश को तोड़ने की कोशिशें अब बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। समाज के हर जिम्मेदार नागरिक को सजग रहना होगा और देश की अखंडता के लिए खड़ा होना होगा।”
बयान से मचा राजनीतिक हलचल
राज्यपाल के इस सख्त बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार के रुख की झलक हो सकता है।
जानिए क्यों है यह बयान अहम?
- पहलगाम में आतंकी हमले में सुरक्षाबलों पर निशाना साधा गया
- बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की हालिया घटनाएं सामने आई हैं
- राज्यपाल का यह बयान सार्वजनिक मंच पर आया, जो एक संवैधानिक पद की गंभीरता को दर्शाता है
- इससे आतंकवाद के प्रति भारत के सख्त रवैये का संदेश भी निकलता है
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का यह बयान केवल दीक्षांत समारोह की एक औपचारिक टिप्पणी नहीं थी, बल्कि यह देश को यह याद दिलाने वाला संदेश था कि अब सहनशीलता की सीमा समाप्त हो रही है। आतंकवाद और धार्मिक अत्याचार पर अब सख्त कदम उठाने की ज़रूरत है, और समाज के हर वर्ग को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।