सुप्रीम कोर्ट ने एक जज के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले यूट्यूबर के ख़िलाफ़ अवमानना कार्यवाही शुरू की
पीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति को अदालतों के जजों को लेकर अपमानजनक आरोप लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह टिप्पणियां अवमानना पूर्ण प्रकृति की है। जो न्यायपालिका की संस्था को बदनाम करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक जज के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले यूट्यूबर के ख़िलाफ़ अवमानना कार्यवाही शुरू की
- रिपोर्ट : मुकेश कुमार : क्राइम एडिटर इन चीफ : नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चंडीगढ़ के पत्रकार और यूट्यूब पर के ख़िलाफ़ स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना कार्यवाही शुरू की।
उन्होंने अपने यूट्यूबर चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो में सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ जज के ख़िलाफ़ अपमानजनक और अवमानना पूर्ण टिप्पणी की थी।
इस मामले की सुनवाई भारत के चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। जिसमें जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस एएस चंदुरकर शामिल थे।
रिटायर जस्टिस न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी के ख़िलाफ़ टिप्पणी करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया था। सीजेआई ने कहा कि उक्त वीडियो क्लिप में कोर्ट के वरिष्ठ जजों में से एक के लिए अपमानजनक टिप्पणियां की है।
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यूट्यूबर पर व्यापक रूप से प्रकाशित ऐसे आरोपों से न्यायपालिका के प्रतिष्ठित संस्था की बदनामी होने की संभावना है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। साथ ही किसी अधिकार पर उचित प्रबंध भी लगाए गए हैं।
पीठ ने कहा है कि किसी व्यक्ति को अदालतों जजों को लेकर अपमानजनक आरोप लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह टिप्पणियां अवमानना पूर्ण प्रकृति की है, जो न्यायपालिका के संस्था को बदनाम करती हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि टिप्पणियां बहुत गंभीर थी और उन्होंने इस मुद्दे का संज्ञान लेने के लिए पीठ के प्रति आभार व्यक्त किया है। पीठ ने निर्देश दिया की आपत्तिजनक वीडियो को तुरंत हटा दिया जाए।
यूट्यूब पर चैनल को एक पक्ष प्रतिवादी बनाया जाएंगा। अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से अदालत की सहायता करने का अनुरोध किया जाता है। पीठ ने कहा कि एक अंतरिम आदेश दोबारा यूट्यूब चैनल को वीडियो का प्रकाशन रोकने और इसे तुरंत हटाने से रोकता है।
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